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मैं शून्य हूँ

 मैं शून्य हूँ... सिर्फ शून्य... जिसके न साथ कोई है, न पहले, न बाद में अकेला शून्य तुम देखो, मुझसे आगे रहकर तुम कितना वजन पाते हो मेरे पीछे रहकर क्या किरदार निभाओगे और मेरे साथ चलकर क्या मुकाम तुम्हारा तुम चाहो तो मुझसे हटकर खुद की कीमत कम कर लो तुम चाहो तो मुझसे मिलकर अपनी कीमत दुगनी कर लो क्योंकि मैं वही हूँ, स्थिर, एक जगह खड़ी शून्य मेरा अस्तित्व खुद में पूरा है न मुझे अकेले शून्य होने का भय न किसी के साथ जुड़कर वजन बढ़ने की खुशी... क्योंकि मैं खुद में पूर्ण हूँ क्योंकि मैं शून्य हूँ