संदेश

aaj ka sach

मैं शून्य हूँ

 मैं शून्य हूँ... सिर्फ शून्य... जिसके न साथ कोई है, न पहले, न बाद में अकेला शून्य तुम देखो, मुझसे आगे रहकर तुम कितना वजन पाते हो मेरे पीछे रहकर क्या किरदार निभाओगे और मेरे साथ चलकर क्या मुकाम तुम्हारा तुम चाहो तो मुझसे हटकर खुद की कीमत कम कर लो तुम चाहो तो मुझसे मिलकर अपनी कीमत दुगनी कर लो क्योंकि मैं वही हूँ, स्थिर, एक जगह खड़ी शून्य मेरा अस्तित्व खुद में पूरा है न मुझे अकेले शून्य होने का भय न किसी के साथ जुड़कर वजन बढ़ने की खुशी... क्योंकि मैं खुद में पूर्ण हूँ क्योंकि मैं शून्य हूँ

पत्नी और प्रेमिका

 संवाद शुरू हुआ पत्नी और प्रेमिका के बीच  सवाल ये था कि किसकी एहमियत क्या है  दोनों ने पन्ने  पलटे  अपने अपने किरदार के...  पत्नी के हिस्से आया औढ़ा, मान सम्मान  Preminka को मिले हज़ारो सवाल, हज़ारो taane  Avaidh होने का apmaan  पत्नी को mili jimmedariyan  और प्रेमिका के हिस्सी आयी रुस्वाइयाँ  पत्नी को मिला सर उठा कर साथ chlne का adhikar  प्रेमिका को naseeb हुआ बंद कमरे का बे hisaab प्यार  पत्नी को मिला घर, gaadi, daulat और जेवरात  प्रेमिका को मिला पूरे दिल पर adhikaar  पत्नी को mili zimmedari घर कि  माँ बाप baccho कि dekhbhal  प्रेमिका को मिला प्रेमी कि मानसिक सुकून का काम  पत्नी को मिले बंद सवाल, छुपा हुआ हाल, सब सही है का jawab  प्रेमिका बनी टूटे दिल, बिखरे हालात और हारे हुए प्रेमी कि ढाल  पत्नी मिला घर खर्च, त्योहारों के कपडे, शादि कि सालगिरह के  jevraat प्रेमिका के हिस्से आयी चुप छुपा कर एक मैसेज, एक कॉल या फिर मिलने का वादा  जब बारी आयी साथ निभाने कि, सम्मान दिलाने कि,  ...

तुम बहुत ख़ास हो

 सुनो मुझे तुमसे कुछ कहना है  मुझे तुम्हे btana है कि तुम मेरे लिए क्या हो  तुम मेरा सुकून हो, मेरे चेहरे का noor हो  तुम मेरी खूबसूरती हो, तुम मेरी khushboo हो  तुम नज़र भर मुझे देख लो तो  मेरा श्रृंगार पूरा सा हो जाता है  तुम मुझे ऊँगली भर छू लो, तो जैसे  जीवन पूरा सा हो जाता है  तुम्हारी सांसो कि जरा सी ahat से महक जाती हूँ  तुम्हारी आवाज से अपना नाम लूँ लू तो  फिर से जी जाती हूँ.  लाखों कि भीड़ हो मुझे क्या लेना  मैं तुम्हारे होने से ही पूरी सी हो जाती हूँ  मुझे बताना है कि तुम मेरी dhadkti hui सांस हो  तुम मेरे मन में छुपा ehsaas हो  जब khushi में आंसू टपक जाते है  तुम वो बात हो.  गम में भी मैं मुस्कुरा दूँ तुम वो साथ हो  तुम बहुत ख़ास हो.  मुझे नहीं कहना कि तुम मेरे हो  मुझे बताना है कि मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ  मुझे बताना है कि तुम कहो न कहो  मैं सब sun leti hoo तुम मेरे लिए छोड़ दो कुछ, मैं नहीं मांगती  मैं त्याग दूँ साँसे भी तुम्हारे लिए  बस जितना जानती हूँ...

Sab kuch badal jata hai

 बहुत कुछ बदल जाता है धीरे धीरे रिश्तो में  सबसे पहले हमारा बात करने का तरीका  फिर हमारी बातें बदल जाती है.  अब वो जूनून नहीं दीखता  एक message  का एक call  का  वो होती तो हैं, हर निर्धारित समय पर  मगर जैसे बस कोई उत्तारदायित्व  निभाना हो  रातो को जागने वाली तड़प एक बोझ बनने लगती है  ज़रा सी बात पर परेशान होना अब रोज के natak लगने लगते है  अब परवाह बस कभी कभी shabdon में सुनाई देती है  अब प्यार बस बंद कमरे में dikhne लगता है.  बात करने कि अवधि घटने लगती है  प्राथमिकताएं  बदलने लगती हैं  जिसे पाने के लिए दुनिया भर को एक तरफ रखते हैं  उसे पाकर दुनिया याद आती है और उसको भूलने लगते हैं  क्युकी वो तो मिल गया, अपना है, कहां जायगा  और धीरे धीरे खोने का डर  भी खत्म होने लगता hai.  पहले जो aadate उसका दीवाना बनाती थी  अब वही आदतें कमी में गिनी जाने लगती हैं  पहले जो सुबह शाम, दिन रात एक हेलो कि तड़प में गुजर जाता था.  अब वो शब्द बस औपचारिकता बन जाते हैं  पहले जिसे प...

Kya yhi hai pyar

 एक दिन बस ऐसे ही दिल में सवाल आया कि आखिर , प्यार क्या होता है ,  और मुझे क्यों जानना था कि प्यार क्या है  क्यूंकि मेरे मन में बहुत सारे सवाल थे इस प्यार को लेकर  मैं  खुद से ही पूछना चाहती थी कि प्यार क्या है  असल में प्यार कि दो परिभाषा hain प्यार वो जो आपको सुकून दे  प्यार वो जो आपसे आपका सुकून छीन ले  प्यार वो जो आपको खुशियां दे,  चैन कि neend सुलाए  प्यार वो जो आपकी सारी  खुशियां छीन ले और  रात रात भर सोने न दे  प्यार वो जो आपको दिन में भी haseen सपने दिखाए  और प्यार वो जो आपको रात भर सपनो में भी डराए  प्यार वो जो आपके लिए दुनिया भर कि चीज़े बड़ी खूबसूरत बना दे  प्यार वो जो आपका मन अपने चहेतो से भी हटा दे  प्यार वो जो आपको दुनिया से वैरागी बना दे और  प्यार वो जो आपको भक्ति के रास में डूबा दे  प्यार वो जो आपको jeena seekha दे  प्यार वो जो आपको जीते जी मौत के दर्शन करा दे  प्यार वो जो पूरी दुनिआ से आपको मिला दे  और प्यार वो जो आपको अपनों से भी हटा दे  प्यार वो जो आपको न्य...

मैं लौट आयी थी,

 मैं लौट आयी थी,  हाँ मुश्किल तो था, आगे बढ़ जाने के बाद  पीछे लौट आना  मगर इस बार ज़रूरी लगा  क्यूंकि इस बार सवाल किसी और से नहीं  मेरे खुद मुझसे थे.  बड़ा आसान था आज तक सवाल करना  की क्या वो मेरे लायक हैं ?  खुद पर इतराना, या फिर उनमे कमियां ढूंढ  लेना  इस बार मुद्दा अलग था,  मेरी परख खुद से थी, उस से नहीं  मेरा किरदार, मेरा रवैया, मेरा व्यवहार  मैंने सब रखे तराज़ू में,  और मैं हैरान थी,  मेरा किरदार तो भरा हुआ था,  गलतियो से, कमियों से, बेरुखी से  आज लगा की मैं ही लायक नहीं थी उनके  आखिर क्या चाहिए था मुझे ? प्यार ? वो तो भरपूर था  लगाव ? वो तो खुद से ज्यादा मेरे लिए परोसा गया था  सम्मान  ? वो तो शायद सबसे ज्यादा मेरे लिए रखा गया था  फिर क्या था, जिसकी कमी मुझे खल रही थी  शायद कुछ भी नहीं.  फिर किस लिए और क्यों ही रुक जाती बार बार सबकी जिंदगी में तकलीफ भरने  क्यों ही रुक जाती,  उसको परेशां करने  क्यों ही रुक जाती, उसका सुकून और चैन छीन  लेने...

मैं खुद से मिल रही थी

मैं धीरे धीरे खुद को खो रही थी   और मुझे लगता रहा की मैं मनमानी हो रही हूँ,  अब मुझे अपने आस पास सब बोझ लगने लगे थे  और मुझे लगता रहा की मैं सीमित हो रही हूँ .  धीरे धीरे मेरे रिश्तें कम होने लगे  और मुझे लगता रहा की मैं मतलबी हो रही हूँ,  समय बीता और मैं एकांत प्रिय हो गयी  मुझे लगा सब मुझसे दूर हो रहे हैं.  धीरे धीरे सब का साथ मुझे चुभने लगा  और मुझे लगता रहा सब व्यस्त हो गए हैं  कब मुझे अँधेरे में रहना भाने  लगा पता नहीं लगा  और मुझे लगा मेरी पसंद नापसंद शायद बदलने लगी है  कब मुझे हम से मैं होना अच्छा लगने लगा  और मुझे लगता रहा मैं सुकून में जी रही हूँ  सच तो ये था की मैं खुद को खो रही थी,  शायद मैं खुद से मिल रही थी  शायद मैं खुद की हो रही थी  प्रीति राजपूत शर्मा  27जून 2025